
Uttarakhand उत्तराखंड : उत्तराखंड स्थित एम्स ऋषिकेश ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के चिकित्सकीय दल द्वारा किए गए अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफल सर्जरी को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि ने न केवल संस्थान का नाम रोशन किया है, बल्कि भारतीय चिकित्सा प्रणाली की क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।
यह जटिल सर्जरी 9 जून 2025 को की गई थी, जिसमें एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ शल्य चिकित्सकों और विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने अहम भूमिका निभाई थी। सर्जरी के दौरान 27 वर्षीय एक युवक के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम वजन का विशाल बोन ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया। यह अब तक दर्ज किए गए मामलों में सबसे भारी बोन ट्यूमर माना जा रहा है।
इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कई विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर काम किया। सर्जरी से पहले मरीज की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया और लंबे समय तक योजना बनाकर ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई। इस प्रक्रिया में ऑर्थोपेडिक सर्जरी, एनेस्थीसिया और अन्य सहयोगी विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान हमेशा मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम की मेहनत, समर्पण और तकनीकी दक्षता का परिणाम है।
प्रो. मीनू सिंह ने यह भी कहा कि एम्स ऋषिकेश का उद्देश्य जटिल से जटिल चिकित्सा मामलों का सफलतापूर्वक उपचार करना और मरीजों को बेहतर जीवन देना है। इस तरह की उपलब्धियां संस्थान को चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रकार का बोन ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ होता है और इसका आकार बढ़ने पर यह शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। मरीज की स्थिति लंबे समय से गंभीर बनी हुई थी, लेकिन विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सफल सर्जरी को अंजाम दिया।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई और धीरे-धीरे उसकी रिकवरी प्रक्रिया शुरू हुई। चिकित्सकों ने बताया कि इस तरह के मामलों में समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इस सर्जरी का दर्ज होना भारतीय चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल एम्स ऋषिकेश की प्रतिष्ठा बढ़ी है, बल्कि देश के अन्य चिकित्सा संस्थानों को भी प्रेरणा मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जटिल सर्जरी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित डॉक्टरों और टीमवर्क की बदौलत ऐसे कठिन ऑपरेशन संभव हो पा रहे हैं।
एम्स प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान के सभी कर्मचारियों और चिकित्सकों की सामूहिक सफलता बताया है। साथ ही भविष्य में और अधिक जटिल चिकित्सा मामलों के समाधान के लिए शोध और तकनीकी विकास पर जोर देने की बात कही है।
यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर मानी जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य मरीजों के लिए भी आशा की किरण बनेगी।





